Saturday, September 14, 2019

Follow On Public Offer (FPO) क्या होता है?

Follow On Public Offer

दोस्तों हम IPO के बारे में तो जान चुके है।

इस लिए आज हम IPO के जैसे ही एक और Issue के बारे में जानेंगे।

वह Issue है, FPO.

हम जानेंगे की FPO क्या होता है ? FPO और Rights Issue में क्या फर्क है ? और FPO कितने प्रकार के होते है?

तो आइए पहले जानते है, की

Follow On Public Offer (FPO) क्या होता है ?


IPO की तरह ही FPO भी एक Public Offer ही है, जिसमे भी कंपनियां अपने शेयर Public को बेचती है।

लेकिन जब कोई Private Company शेयर बाजार में पहली बार अपने Share Public को बेचती है।

और तब उस कंपनी की Listing Stock Exchange पर होती है, तो इस प्रक्रिया को IPO यानी Initial Public Offer कहा जाता है।

क्युकी वह पहली बार ही Public को अपने शेयर Issue कर रही है।

लेकिन कई बार IPO के बाद भी कंपनीओ को शेयर बेचकर पैसा जुटाने की जरुरत होती है।

तब वह दूसरी बार अपने शेयर Public को Issue कर के पैसा जुटाती है।

इस दूसरी बार पैसा जुटाने की प्रक्रिया को ही FPO या Follow On Public Offer कहते है।

FPO को कुछ लोग Further Public Offer भी कहते है।

लेकिन पिछली पोस्ट में तो हमने जाना की IPO के बाद कंपनी Rights Issue के जरिए पैसा जुटाती है।

तो फिर आइए जानते है, की

FPO और Rights Issue में क्या फर्क है?


जब भी कंपनी IPO के बाद भी शेयर बाजार से पैसा जुटाना चाहे तब अगर वह सिर्फ अपने शेयर धारको को ही अपने शेयर बेचना चाहे तो वह Rights Issue होता है।

क्युकी कंपनी सिर्फ अपने शेयर धारको को ही Discount में शेयर खरीदने का Right देती है।

मगर FPO में ऐसा नहीं होता।

FPO में कंपनी अपने शेयर सिर्फ उसके निवेशकों को नहीं बल्कि Public को Offer करती है।

इस लिए FPO में कोई भी व्यक्ति आवेदन कर सकता है।

जबकि Rights Issue में आवेदन करने के लिए आपको पहले से ही कंपनी का शेयर धारक होना आवश्यक होता है।

अब हम जानते है, की

FPO कितने प्रकार के होते है ?


FPO या Follow On Public Offer दो प्रकार के होते है :
  • Dilutive FPO
  • Non-dilutive FPO

1) Dilutive FPO क्या होता है ?


अगर कंपनी किसी FPO में अपने नए शेयर जारी कर के बेचती है, तो उस FPO को Dilutive FPO कहते है।

क्युकी कंपनी द्वारा नए शेयर बनाने से बाज़ार में कुल शेयर की संख्या बढ़ जाएगी।

जिस से कंपनी की Earnings पहले से ज्यादा शेयर में बटेगी।

और एक शेयर के हिस्से में पहले से कम Earning आएगी।

इस स्थिति को Equity Dilution कहते है।

इस लिए अगर कंपनी किसी FPO में अपनी Equity Dilute करती है, तो उस FPO को Dilutive FPO कहते है।

EPS के dilute हो जाने के कारण जब कोई कंपनी Dilutive FPO लाने का ऐलान करती है, तब उस कंपनी के शेयर के दाम आम तौर पर गिरने लगते है।

क्युकी Equity Dilution से शेयर धारक को नुकसान होता है।

अब जानते है, की

2) Non-dilutive FPO क्या होता है ?


अगर कंपनी FPO में खुद नए शेयर जारी नहीं कर रही बल्कि कंपनी के Promotor अपने कुछ शेयर बेच रहे है, तो इस में कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाते।

जिस से Equity Dilution नहीं होता।

इस लिए इस तरह के FPO को Non-dilutive FPO कहा जाता है।

Dilutive और Non-dilutive FPO के बिच एक बहुत बड़ा difference है।

और वो यह है, की Dilutive FPO द्वारा जुटाया गया पैसा कंपनी के पास जाता है।

लेकिन Non-dilutive FPO के द्वारा जुटाया गया पैसा जिन शेयर धारक या Promotor ने अपने शेयर बेचे है, उनके पास जाता है।

इस लिए Dilutive FPO का पैसा ज्यादातर कंपनी के क़र्ज़ को कम करने के लिए ही उपयोग किया जाता है।

जिस वजह से एक तरह से देखा जाए तो Dilutive FPO कंपनी के लिए लाभदायी भी है।

निष्कर्ष :


दोस्तों आज हमने सीखा की FPO क्या होता है ? FPO और Rights Issue में क्या फर्क है ? और जाना की FPO के प्रकार क्या है ?

तो दोस्तों उम्मीद करता हु यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी।

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