Friday, September 20, 2019

Financial Leverage का मतलब क्या होता है?

Financial Leverage.

दोस्तों अब तक हम कंपनी की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए बहुत से Ratio के बारे में जान चुके है।

ऐसे ही आज हम एक और Ratio के बारे में जानेंगे।

यह Ratio है, Financial Leverage.

तो आइए जानते है की ,

Financial Leverage क्या होता है?


Financial Leverage का मतलब है, कंपनीओ का निश्चित ब्याज वाले क़र्ज़ ले कर उसकी कमाई को बढ़ाना।

जैसे अगर किसी कंपनी में निवेशक के 10 हज़ार रुपए लगे है, और उसका उपयोग कर के कंपनी ने 1000 रुपए कमाए।

ऐसे में कंपनी की कमाई 10 % होगी।

वही अगर उसी कंपनी में 5000 रुपए निवेशक ने निवेश किया होता।

और बाकी का 5000 का क़र्ज़ होता और तब भी कंपनी 1000 रुपए ही कमाती तो उसकी कमाई निवेश के 20 % होती।

यहाँ पर कंपनी द्वारा क़र्ज़ लेकर निवेशक के रिटर्न को बढ़ाया गया है।

क्युकी पहली स्थिति में निवेशक को 10 % रिटर्न मिला है, जब की दूसरी स्थिति में 20 % रिटर्न मिला है।

इसी चीज़ को ही  Financial Leverage कहते है।

बहुत सी कंपनियां इसी तरीके से अपना और निवेशकों का रिटर्न बढाती है।

जो की गलत नहीं है।

लेकिन जब तक कंपनी क़र्ज़ के लिए देने वाले ब्याज से ज्यादा मुनाफा कमाती है, तब तक ही  Financial Leverage उपयोगी है।

उसके बाद कंपनी के लिए  Financial Leverage नुकसान देने वाला होता है।

क्युकी कंपनी चाहे कितना भी पैसा कमाए या न भी कमाए तो भी उसे ब्याज तो देना ही पड़ता है।

और अगर किसी स्थिति में कंपनी देने लायक ब्याज से कम मुनाफा कमाती है, तो वह ब्याज नहीं भर पाएगी।

जिस से वह मुश्किल में पड़ जाएगी और उसे जुडी News आने से उसके शेयर का दाम गिर सकता है।

ऐसे में उस कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों को नुकसान हो सकता है।

इस लिए एक निवेशक के तौर पर हमें  Financial Leverage को समझना बहुत जरुरी है।

तो आइए एक उदाहरण से  Financial Leverage को समझते है।

Financial Leverage का उदाहरण :


Company A जिसके पास 4000 करोड़ की Equity है, और 6000 करोड़ का क़र्ज़ है।

इस क़र्ज़ पर उसे 10 % हर साल का ब्याज देना पड़ता है।

इस लिए Company A के लिए यह ब्याज 600 करोड़ रुपए हर साल होगा।

अब पिछले साल में Company A ने ब्याज़ देने से पहले 1500 करोड़ का मुनाफ़ा कमाया।

और इस वजह से ब्याज देने के बाद कंपनी का मुनाफा 900 करोड़ रह गया जिसे हम Profit Before Tax (PBT) कहते है।

इसके बाद कंपनी को 25 % Tax देना पड़ा।

जिस के बाद उसका शुद्ध मुनाफा 675 करोड़ हुआ।

यानी निवेशकों को 4000 करोड़ के निवेश पर 675 करोड़ का रिटर्न मिला।

अब अगले साल Company A को ब्याज देने से पहले 1500 करोड़ के मुनाफे के बदले केवल 500 करोड़ का मुनाफा ही हुआ।

जिसमे से उसे 600 करोड़ का तो ब्याज ही देना है।

ऐसा करने पर कंपनी को मुनाफ़े के बदले 100 करोड़ का नुकसान होता।

तो अगर ज्यादा समय तक ऐसा ही रहा तो कंपनी की आर्थिक स्थिति बहुत बुरी हो जाएगी।

जिस से उसके निवेशकों को नुकसान होगा।

वही अगर कंपनी ने 6000 करोड़ के बदले थोड़ा कम क़र्ज़ लिया होता तो उसे ब्याज भी कम देना पड़ता।

जिस से उसकी आर्थिक स्थिति इतनी बुरी नहीं होती।

इस उदाहरण से हमें यह समझना चाहिए की अगर कंपनी  Financial Leverage से अपना Profit बढाती है, तो वह अच्छा है।

लेकिन यह इसके लिए लिया गया क़र्ज़ लिमिट में ही होना चाहिए।

जिस से कंपनी की आर्थिक स्थिति बुरी न हो।

निष्कर्ष :


दोस्तों आज हमने सीखा की  Financial Leverage क्या होता है ? और उसको हमने उदाहरण से समझा।

उम्मीद करता हु आपके लिए यह जानकारी बहुत उपयोगी साबित होगी।

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