Tuesday, August 20, 2019

Depreciation Meaning in Hindi - क्या है Depreciation ?


Depreciation Meaning in Hindi.

इस से पहले हमने D'Mart के उदहारण से Profit & Loss Statement को समझा था।

जिसमे Expenses में दो Expense थे Depreciation और Amortization.

इन दोनों में से आज हम Depreciation का मतलब और उसका उपयोग क्यु होता है वह जानेंगे।

Depreciation Meaning in Hindi :


Depreciation का सामान्य भाषा में मतलब हम निकाल सकते है, घिसावट।

यानी कंपनीओ के पास जो भी Tangible Assets है, जैसे Building, Plant, Machines आदि कि किमत में समय के साथ आने वाली कमी।

जैसे कंपनी A ने आज 1 लाख रुपए में कोई Machine खरीदी और उसका उपयोग करना शुरू किया।

अब 10 - 15 साल के बाद अगर कंपनी यह Machine बेचना चाहे तो क्या उसे 1 लाख रुपए मिलेंगे।

नहीं ना ?

क्युकी 10 साल बाद वह मशीन पुरानी हो गई है, और अब उसका उपयोग नहीं किया जा सकता।

इसी तरह कंपनी के सभी Tangible Assets कुछ सालो बाद पुराने होंगे जिसका उपयोग उसकी एक निश्चित Life तक ही किया जा सकेगा।

और फिर उनकी भी किमत कम हो जाएगी।

इसके आलावा Technology पुरानी होने पर भी कुछ Assets की किमत कम या नहीं के बराबर हो जाएगी।

जैसे सालो पहले रिल वाले कैमरे चलते थे जिसमे काले कलर की Negatives आती थी।

उसको बार बार बदलना पड़ता था।

लेकिन आज के Smart Phone के ज़माने में उन कैमेरो की Technology पुरानी हो गई है।

जिस से उन्हें शायद कोई नहीं खरीदता होगा। इसी वजह से उनकी कीमत कम हो गई है।

इस किमत कम हो जाने को ही Depreciate हो जाना कहते है।

और इस प्रक्रिया को Depreciation कहते है।

Depreciation Meaning in Hindi की Entry :


किसी भी कंपनी में Depreciation की Entry उसके Profit & Loss Statement और उसके Cash Flow Statement में होती है।

Profit & Loss Statement में यह Depreciation को Revenue में से घटाया जाता है।

Depreciation एक Non Cash Expenditure होने की वजह से उसे Cash Flow Statement में Profit Before Tax में से वापस जोड़ा जाता है।

हमने D'Mart के उदाहरण में Profit & Loss Statement और Cash Flow Statement में यह Entry देखी थी।

Depreciation क्यु गिना जाता है ?


Depreciation को कंपनी के Financial Statements में गिनने के तीन कारण है :

1) Assets की सही किमत दिखाने के लिए :


Company A ने साल 2010 में 20 लाख रुपए में एक Machine खरीदी थी।

जिसकी औसत उम्र यानी जितने साल तक वह Machine काम आ सकती है, वह 10 साल थी।

तब उसकी Balance Sheet में उस Machine की किमत 20 लाख रुपए दिखाई थी।

अब उसने हर साल Depreciation के उपयोग से उस Machine की किमत घटाई नहीं है।

यानी आज 9 साल बाद भी उसकी Balance Sheet में उस Machine की किमत 20 लाख रुपए लिखी है।

और इस साल उस कंपनी ने उस मशीन को बेचा तो उसे सिर्फ 2 लाख रुपए ही मिले।

लेकिन Balance Sheet के अनुसार उस Machine की कीमत 20 लाख रुपए है।

जिस से Balance Sheet पढ़ने वाले निवेशक को तो लगेगा की कंपनी ने उस मशीन को बेचकर 18 लाख का नुकसान किया।

लेकिन असल में यह सच नहीं है।

यानी कंपनी की Balance Sheet उसकी संपत्ति और दायित्वों की सही किमत नहीं दिखा पाई।

जो की गलत हो जाएगा।

लेकिन अगर कंपनी ने Depreciation को Financial Statement में गिना होता तो ऐसा नहीं होता।

क्युकी उस मशीन की औसत आयु 10 साल थी, और उसकी किमत 20 लाख रुपए थी।

इस हिसाब से उस मशीन का हर साल का खर्च 2 लाख रुपए आएगा।

और इस तरह हर साल 2 लाख रुपए कंपनी ने Machine की किमत में से कम कर दिए होते।

यानी पहला साल ख़त्म होने पर उस Machine की किमत 20 लाख नहीं लेकिन 18 लाख लिखी जाती।

ऐसा करते करते आज 9 साल बाद कंपनी की Balance Sheet में उस Machine की किमत सिर्फ 2 लाख रुपए ही होती।

अब अगर वह कंपनी उस मशीन को 2 लाख रुपए में बेचेगी तो निवेशक को ऐसा नहीं लगेगा की कंपनी ने 18 लाख का नुकसान किया है।


2) Assets के खर्च को उसकी Useful life में Allocate करने के लिए :



Depreciation को Financial Statements में गिनने का दूसरा कारण है Assets के खर्च को उसकी प्रति साल के खर्च में बदलना।

जैसे हमने ऊपर के उदाहरण में देखा की Company A ने साल 2010 में एक Machine 20 लाख में खरीदी।

अब अगर उसके Profit & Loss Statement में वह खर्च के तौर पर पुरे 20 लाख रुपए तो यह गलत होगा।

क्युकी कंपनी के P & L में जो आय है, वह तो सिर्फ 1 साल की है, जबकि वह मशीन तो 10 साल चलेगी।

तो 10 साल का Machine का खर्च एक साल की आय में से कम नहीं किया जा सकता।

और अगर उस साल कंपनी की आय 20 लाख से कम होगी तो कंपनी का P & L Loss दिखाएगा।

जबकि कंपनी सच में Loss में नहीं है।

इस वजह से जितने साल उस Machine को उपयोग कर सकते है, उतने साल को उसकी किमत से विभाजित किया जाता है।

जिस से उस एक साल में उस Machine का खर्च मिलता। ऊपर के उदाहरण में वह था 2 लाख रुपए।

इस लिए हर साल कंपनी A अपने P & L में 2 लाख रुपए का Machine का खर्च दिखाएगी।

जिस से कंपनी का P & L उस के मुनाफे की सही स्थिति बताएगा।


3) नए Assets खरीदने के लिए पैसा जमा करने के लिए :



तीसरा कारण है, नया Asset खरीदने के लिए पैसा जुटाने के लिए।











Company A के उदाहरण में हमने देखा की Machine की आयु 10 साल की थी।

अब 10 साल बाद यानी 2020 में नई Machine खरीदनी पड़ेगी।

तो उसके लिए भी पैसा जुटाना पड़ेगा।

यह पैसा Depreciation को गिनती में लेने से अपने आप इकठ्ठा हो जाता है।

हमने ने देखा था की कंपनी A हर साल 2 लाख रुपए Machine खर्च दिखाएगी।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की कंपनी हर साल 2 लाख रुपए ही चुकाने है।

Machine की पूरी किमत तो उसे खरीदते वक्त ही चुकानी पड़ेगी।

लेकिन यह पूरी किमत एक साथ खर्च के तौर पर नहीं दिखा सकते।

इस लिए हर साल 2 लाख रुपए खर्च के तौर पर दिखाएगी।

लेकिन यह खर्च कंपनी को सच में नहीं चुकाना पड़ता।

इस लिए हर साल जो राशि खर्च के तौर पर P & L statement में से घटाते है, उतना Cash कंपनी के पास ही पड़ा रहता है।

अब यह खर्च है 2 लाख रुपए।

यानी कंपनी के पास हर साल 2 लाख रुपए इस तरह 10 साल में 20 लाख रुपए जमा हो जाएंगे।

और तब तक पुरानी Machine की आयु भी ख़त्म हो जाएगी और उस जमा पैसे में से नई मशीन खरीदी जा सकती है।

इस तरह Depreciation का उपयोग कर कंपनी नए Assets के लिए पैसा इकठ्ठा कर सकती है।

तो दोस्तों यह था Depreciation Meaning in Hindi.

उम्मीद करता हु यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी।

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धन्यवाद।

Depreciation को इन्होने भी अपने इस Video में बहुत अच्छे से समझाया है।






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