Friday, August 23, 2019

Contingent Liabilities Example से समझे।

Contingent Liabilities Example.

इस से पहले हमने Assets और Liabilities के बारे में जाना था।

जिसमे हमने Current और Non Current Liabilities के बारे में जाना था।

आज हम उसी से जुडी एक Liabilities के बारे में जानेंगे।

जो है, Contingent Liabilities.

क्या है Contingent Liabilities ?


Contingent Liabilities का मतलब है संभावित दायित्व।

यानी ऐसा दायित्व जो शायद दायित्व बन सकता है या नहीं भी बन सकता।

यह दायित्व बनेगा या नहीं यह भविष्य में होने वाली कुछ घटना पर आधारित होता है।

नहीं समझ आया ?

कोई बात नहीं।

किसी भी चीज़ को उदाहरण से बहुत अच्छी तरह से समझ सकते है।

Contingent Liabilities भी निचे के उदाहरण से समझ आ जाएगी।

Contingent Liabilities Example :


श्रीमान वर्मा ने Company A जो की Laptop बनाकर बेचने का काम करती है उस से अपने लिए एक नया Laptop 50 हजार रूपर में खरीदा है।

इस Laptop पर Company A ने उन्हें 1 साल की पूरी गारंटी दी है।

जिसमे अगर 1 साल तक वह Laptop या उसके Parts ख़राब हो गए तो Company उस Parts या पुरे Laptop को बदल कर देगी।

जिसके लिए Company श्रीमान वर्मा से कोई भी चार्ज नहीं लेगी।

अब इस स्थिति में Company A के लिए उस Laptop या फिर उसके Parts की कीमत Contingent Liability बन जाएगी।

क्युकी अगर 1 साल के अंदर श्रीमान वर्मा जी के Laptop या उसके Parts में कोई खराबी आई तो Company को वह बदल देने पड़ेंगे।

जिसका खर्च सीधा सीधा Company खुद के ऊपर आ जाएगा।

जिस से वह खर्च Company को खुद की जेब में से देना पड़ेगा।

लेकिन अगर उस 1 साल में कोई खराबी नहीं आई तो Company के लिए कोई खर्च नहीं है, इस लिए कोई Liability नहीं है।

इस तरह यहाँ पर Company के लिए वह खर्च Liability बनेगा या नहीं वह भविष्य में Laptop ख़राब होगा या नहीं उसके ऊपर निर्भर है।

इस लिए उस खर्च को Contingent Liability कहेंगे।

अभी भी न समझ आया हो तो एक और समझते है।

Contingent Liabilities Example 2 :


श्रीमान शर्मा जो एक व्यापारी है, उनको अपने व्यापार के लिए कुछ क़र्ज़ चाहिए था।

इसके लिए वह एक दिन Bank में क़र्ज़ के लिए आवेदन करने के लिए गए।

लेकिन श्रीमान शर्मा की कोई Credit History न होने की वजह से Bank ने उन्हें कोई Guarantor लाने को कहा।

अब शर्मा जीने अपने दोस्त वर्मा जी को इसके बारे में कहा जिनका पहले से ही उस Bank में खाता था।

और उनकी Credit History भी बहुत अच्छी थी।

इस लिए वर्मा जी ने उस Bank को शर्मा जी के क़र्ज़ के लिए गारंटी दी।
यानी अगर शर्मा जी Bank से लिया हुआ क़र्ज़ नहीं चुकाएंगे तो वर्मा जी खुद उस क़र्ज़ को चूका देंगे।

इस उदाहरण मे भी अगर भविष्य में शर्मा जी अपना क़र्ज़ नहीं चुकाते है, तो वर्मा जी को वो क़र्ज़ चुकाना पड़ेगा।

लेकिन अगर शर्मा जी वो क़र्ज़ चूका देते है, तो वर्मा जी को खुद कुछ नहीं चुकाना पड़ेगा।

यानी वर्मा को वह क़र्ज़ चुकाना है, या नहीं वह भविष्य में शर्मा जी क़र्ज़ चुकाते है या नहीं उस निर्भर करता है।

इस लिए श्रीमान वर्मा जी के लिए वह क़र्ज़ एक Contingent Liability है।

अब तो आप इसके बारे में समझ ही गए होंगे अब देखते है,

Contingent Liabilities की Entry कहा होती है ?


एक निवेशक के तौर पर हम जिस Company में निवेश करना चाहते है, उसकी कोई Contingent Liability है या नहीं यह जानना बहुत जरुरी है।

क्युकी शायद ऐसा हो सकता है, की कंपनी की कोई बड़ी Liability हो जिसका हमें पता न हो।

Contingent Liability की Entry दो चीज़ो पर निर्भर है।
  1. उस संभावित Liability की सचमे Liability बनने की कितनी ज्यादा संभावना है।
  2. और उस Liability की राशि का अनुमान लगाया जा सकता है या नहीं।
अगर सच में Liability बनने की संभावना कम से कम 50 % हो और साथ में उस की राशि का अनुमान लगाया जा सकता हो तभी उसकी Entry Balance Sheet और Profit & Loss Statement में की जाती है।

लेकिन अगर ऐसा न हो तो कोई भी Financial Statement में इस की Entry नहीं की जाती।

मगर Notes to Financial Statement में जानकारी देने के लिए लिख दी जाती है।

इस लिए अब से किसी भी कंपनी का Analysis करते वक्त उसकी Notes भी जरुर पढ़े।

तो दोस्तों यह थी Contingent Liabilities के बारे में जानकारी।

उम्मीद करता हु यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी।

ऐसी ही जानकारी सीधे अपने Email पर Free में पाने के लिए हमारे Free Weekly Newsletter को जल्दी से Subscribe कर ले।

धन्यवाद।



Comments