Monday, June 3, 2019

Inflation Meaning in Hindi - मुद्रास्फीति क्या है ?

Inflation Meaning in Hindi.

क्या आप जब छोटे थे तब जितने रुपए में 1 लीटर दूध मिलता था,

क्या आज भी उतने ही रुपए में 1 लीटर दूध मिलता है ?

यकीनन नहीं मिलता होगा।

तो इतने वर्षो में ऐसा क्या हुआ की वही एक लीटर दूध की कीमत आज बहुत ज्यादा बढ़ गई ?

यह सब Inflation यानि मुद्रास्फीति का खेल है।

क्या है मुद्रास्फीति ? (Inflation Meaning in Hindi)


मुद्रास्फीति का मतलब है मुद्रा यानी Currency का बढ़ना।


इसे एक उदहारण के जरिए अच्छी तरह से समझा जा सकता है।

साल 1996 में 10 ग्राम (1 तोला) सोने का दाम 5100 के करीब था, और आज जून 2019 में 10 ग्राम (1 तोला)  सोना 33000 के करीब है।

अगर आप 30000 रुपए से 1996 में सोना खरीदते तो आपके पास लगभग 6 तोला (60 ग्राम) सोना आता।

जबकि आज आप 30000 रुपए से सोना खरीदने जाएंगे तो आपको पूरा 1 तोला सोना भी नहीं मिलेगा।

तो इन 23 साल में 30 हजार रुपए की चीज़े खरीदने की शक्ति (Purchasing Power) बहुत कम हो गई है।

इसे मुद्रास्फीति कहते है।

आपने कई बार बुजुर्गो को कहते हुए सुना होगा की हम जब छोटे थे तब 1 रुपए में तो 4-5 दिन का राशन आ जाता था।

लेकिन अब तो 1000 रुपए में भी उतना राशन नहीं आता है।

यह भी मुद्रास्फीति का ही उदहारण है।

मुद्रास्फीति की वजह से किसी भी देश की करंसी (मुद्रा) की चीज़े खरीदने की शक्ति कम हो सकती है।

इस मुद्रास्फीति का असर देश के लगभग सभी वर्गों पर पड़ता है।

क्युकी खाने पीने जैसी सामान्य जरूरत की वस्तुओं से लेकर सौख और विलासिता की चीजे सभी को खरीदने के लिए ज्यादा पैसा लगता है।

Inflation या मुद्रास्फीति को एक तरह से सामान्य भाषा में महंगाई बढ़ जाना ऐसा कह कर भी समझा जा सकता है ।

आइए अब जानते है की Inflation Meaning in Hindi

Inflation या मुद्रास्फीति का कारण क्या है ?


मुद्रास्फीति होने या फिर Inflation के मुख्य तीन कारण हो सकते है।
  1. ब्याज दर कम होना
  2. चीज़ो की सप्लाई या आपूर्ति कम होना।
  3. तंत्र में ज्यादा पैसा आना।

1. ब्याज दर कम होना :


देश में ब्याज दर कम होने के कारण लोगो को ज्यादा ब्याज देना नहीं पड़ता।

इस वजह से ज्यादा लोग बैंक से लोन ले लेते है और जिसकी बहुत जरुरत न हो वैसी चीज़े भी खरीदने लग जाते है।

जिस से बाजार में उन चीज़ो की खपत (डिमांड) बढ़ जाती है, और किसी भी चीज़ की खपत होने पर साधारण बात है की उसका दाम बढ़ेगा।

और दाम बढ़ने से पहले जितने ही पैसो में कम चीज़े खरीद सकते है।

2. चीज़ो की सप्लाई या आपूर्ति कम होना :



अगर किसी वजह से बाजार में किसी चीज़ो की सप्लाई या आपूर्ति कम हो जाती है,

तो डिमांड यानि खपत तो उतनी ही है, जिस से उस चीज़ के दाम बढ़ जाते है।

जैसे किसी बाजार में किसी वजह से कोई सामान प्रोडक्ट बनाने वाली तीन कंपनी में से एक बंध हो जाए तो ?

निश्चित तौर पर उस प्रोडक्ट या वस्तु का दाम बढ़ जाएगा।

3. तंत्र में ज्यादा पैसा आना :


मुद्रास्फीति या Inflation का तीसरा कारण है, सरकार द्वारा ज्यादा पैसा तंत्र में भेजना।

जब कोई सरकार या अधिकृत बैंक देश में ज्यादा पैसा छापती है, तब लोगो के हाथ में ज्यादा पैसा आता है।

ज्यादा पैसा आने से लोगो का यह स्वाभाव है की वह बढे हुए पैसो को भी खर्च करना चाहेंगे।

जिसके कारण बहुत सी चीज़ो की डिमांड बढ़ेगी और उस से उन चीज़ो का दाम बढ़ेगा।

उदहारण से समझिए।

अगर किसी देश में कुल मिला कर बस 10 हजार रुपए ही है जिनसे ही सभी लोग एक दूसरे की वस्तुए खरीद रहे है।

अब अगर उस देश में 10500 रुपए आ जाते है, तो लोग उस अधिक 500 रुपए को भी खर्च करना चाहेंगे।

जिस से चीज़ो की खपत बढ़ेगी और उस से चीज़ो के दाम बढ़ेंगे।

Inflation या मुद्रास्फीति पर नियंत्रण कौन करता है ?


भारत में Inflation पर नियंत्रण RBI द्वारा किया जाता है।

आपने सुना होगा की RBI द्वारा समय समय पर ब्याजदर बढाया और घटाया जाता है।

यह ब्याजदर बढ़ने और घटने से Inflation पर काबू किया जा सकता है।

जब RBI को यह पता चलता है की इस बार महंगाई सामान्य से अधिक बढ़ रही है, तब वह ब्याज दर बढाती है।

ब्याज दर बढ़ाने से कम लोग लोन लेंगे और लोगो के पास पैसा कम आएगा जिस से चीज़ो की खपत बहुत नहीं बढ़ेगी।

और खपत न बढ़ने से महंगाई कम हो जाएगी। Inflation Meaning in Hindi

तो फिर RBI द्वारा सीधे ही ब्याज दर को बहुत बढ़ा कर महंगाई कम क्यों नहीं किया जाता ?

यह भी पढ़े : CAGR का मतलब क्या है ?

ऐसा नहीं कर सकते क्युकी किसी भी देश के विकास के लिए थोड़ी बहुत महंगाई जरुरी भी है।

अगर महंगाई ख़त्म हो जाएगी तो देश का विकास नहीं होगा।

उम्मीद करता हु दोस्तों की आपको Inflation Meaning in Hindi के बारे में समझ आ गया होगा।

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