Friday, April 26, 2019

Debentures Meaning in Hindi - Debentures

Debentures Meaning in Hindi.

क्या आप बैंक से ज्यादा लेकिन शेयर बाजार से कम जोखिम ले कर हर साल निश्चित ब्याज कमाना चाहते है ?

तो आप डिबेंचर्स में निवेश कर के ऐसा कर सकते है।

जानिए डिबेंचर्स क्या होते है ?

और

कैसे एक सामान्य निवेशक डिबेंचर्स खरीदकर लम्बे समय के लिए एक निश्चित ब्याज प्राप्त कर सकता है ?


डिबेंचर्स क्या होते है ? (Debentures meaning in Hindi):



डिबेंचर्स एक तरह का ऋणपत्र है।

जिस के जरिए कंपनिया अपने व्यापर के लिए आवश्यक पैसा जुटाती है।

कंपनिया अगर शेयर जारी करना न चाहे तो वह यातो बैंक से लोन ले सकती है या फिर इस तरह के डिबेंचर्स इशू करती है।

डिबेंचर्स इशू कर के वह निवेशकों से कुछ सालो तक अपने लिए पैसा उधार लेती है।

इस के बदले में वह निवेशक को निश्चित ब्याज देती है।

यह ब्याज कंपनिया दो तरीके से दे सकती है यातो हर साल या फिर परिपक़्व होने पर सभी साल का ब्याज और मूल राशि साथ में।

यह ब्याज कितना होगा , किस तरह मिलेगा और कितने साल के लिए पैसा देना होगा यह सब कुछ डिबेंचर पर लिखा होगा।

अगर कोई निवेशक लम्बे समय तक हर साल एक निश्चित ब्याज पाना चाहे तो वह डिबेंचर्स में निवेश कर के ऐसा कर सकता है।

डिबेंचर्स परिपक़्व हो जाने पर वह डिबेंचर्स कंपनीओ को दे कर निवेशक अपना पैसा वापिस पा सकता है।

अलग अलग डिबेंचर्स की अलग अलग विशेषताए होती है।


डिबेंचर्स के प्रकार। (Types Of Debentures):



अलग अलग आधार पर डिबेंचर्स के अलग अलग प्रकार है।

1 . Redeemable और Irredeemable debentures:


इस तरह के प्रकार डिबेंचर्स कितनी अवधि के लिए है उस पर से आए है।

i. Redeemable debentures : Debentures Meaning in Hindi


इस तरह के डिबेंचर्स किसी निश्चित अवधि के बाद कंपनिया वापिस ले लेती है और निवेशक का पैसा उसे वापिस दे दिया जाता है।

यह अवधि अलग अलग हो सकती है।

उस पूरी अवधि के दौरान निवेशक को निश्चित ब्याज मिलता रहता है।

अवधि पूरी होने पर मूल राशि मिल जाती है।

ii. Irredeemable debentures :


इस तरह के डिबेंचर्स की कोई निश्चित अवधि नहीं होती।

इस लिए जब तक कंपनिया बंध नहीं हो जाती तब तक निवेशक को सिर्फ ब्याज मिलता रहता है।

मूल राशि अगर कंपनिया बंध होने के समय बैंक की लोन और बॉन्ड धारको को पैसा चुकाने के बाद अगर पैसा बचता है तभी निवेशक को वापस मिलती है।

इस लिए इस तरह के डिबेंचर्स में पैसा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

भारत के निवेशकों को इस से डरने की जरुरत नहीं है क्युकी भारत में इस तरह के डिबेंचर्स इशू नहीं किए जाते है।

2. Secured और Unsecured debentures :


इस तरह के डिबेंचर्स उसकी सुरक्षा के आधार पर से आए है।

i. Secured debentures : Debentures Meaning in Hindi


सुरक्षित डिबेंचर्स अपने नाम की तरह ही सुरक्षित होते है।

यह सुरक्षा कंपनी की किसी संपत्ति के रूप में होती है।

जैसे बैंक के लिए होम लोन पर घर एक सुरक्षा की तरह काम करता है।

अगर बैंक को उसकी लोन की राशि वापिस न मिले तो वह जिस घर के लिए लोन दिया था उसे बेचकर अपना पैसा वापस जुटा सकती है ।

इसी तरह सिक्योर्ड डिबेंचर्स में कंपनी की कोई संपत्ति सुरक्षा के तौर पर रखी जाती है।

इस संपत्ति को संभालने के लिए एक ट्रस्टी को दिया जाता है।

ii. Unsecured debentures :


असुरक्षित डिबेंचर्स में डिबेंचर्स के इलावा कोई सुरक्षा नहीं होती।

यानि अगर कंपनी निवेशक का पैसा ले कर भाग जाए तो निवेशक की मूल राशि का नुकसान हो सकता है।

यह डिबेंचर्स निवेशक डिबेंचर्स इशू करने वाली कंपनी के लाभ देने वाले व्यापर और कंपनी की प्रतिष्ठा के ऊपर खरीदता है।

3. Registered और Unregistered debentures :


डिबेंचर्स के यह प्रकार डिबेंचर्स की मलिकी से आए है।

i. Registered debentures : Debentures Meaning in Hindi


रजिस्टर्ड डिबेंचर्स में निवेशक का नाम होता है। और इसकी जानकारी कंपनी के पास रजिस्टर्ड होती है।

यह कुछ हद तक अकाउंट पेय चेक की तरह होता है।

जिस व्यक्ति का नाम डिबेंचर्स पर होगा उसे ही ब्याज मिलेगा।

अगर निवेशक उस डिबेंचर को बेचना चाहे तो उसके लिए उसे कंपनी के द्वारा उसे खरीद दार के नाम पर ट्रांसफर करवाना होगा।

ii. Unregistered debentures :


Unregistered डिबेंचर्स में किसी का नाम रजिस्टर्ड नहीं होता।

यह कुछ हद तक रुपियो की नोट की तरह ही होता है।

यह डिबेंचर्स जिस के पास होता है वही उसका मालिक कहलाता है।

और उसे ही ब्याज मिलता है।

4. Convertible और Non-convertible debentures :


यह दोनों प्रकार डिबेंचर्स की कन्वर्शन की विशेषता पर से है।

i. Convertible debentures : Debentures Meaning in Hindi


कनवर्टिबल डिबेंचर्स ऐसे डिबेंचर्स होते है जिन्हे निश्चित समय अवधि के बाद शेयर में कन्वर्ट किया जा सकता है।
किस दाम के शेयर कन्वर्ट होंगे वह भी डिबेंचर पर लिखा होता है।

इसका लाभ निवेशक तब उठा सकता है जब उस कंपनी के शेयर बहुत उचाई पर हो।

डिबेंचर्स को शेयर में कन्वर्ट कर के उसे स्टॉक एक्सचेंज पर बेच सकता है।

ii. Non-convertible debentures : Debentures Meaning in Hindi


नॉन कनवर्टिबल डिबेंचर्स ऐसे डिबेंचर्स होते है जिन्हे शेयर में कन्वर्ट नहीं किया जा सकता है।

इस में निवेशक को सिर्फ ब्याज ही मिलेगा और समय अवधि ख़त्म होने पर मूल राशि वापस मिलेगी।

अगर निवेशक चाहे तो इसे दूसरे निवेशक को बेच कर ही पैसा वापिस लेना होगा।

5. Callable और Putable debentures :


i. Callable debentures : Debentures Meaning in Hindi


इस तरह के डिबेंचर्स में एक सुविधा है जिस से कंपनिया अगर चाहे तो निश्चित समय के बाद डिबेंचर्स को वापिस ले सकता है।

और निवेशक को उसका पैसा वापिस दे दिया जाता है।

ऐसा कंपनी उस वक्त करती है जब कंपनी को डिबेंचर्स के निश्चित ब्याज से कम ब्याज पर बाजार से पैसा मिल सकता हो।

इस तरह कंपनी अपना ब्याज भुगतान कम कर सकती है।

ii. Putable debentures : Debentures Meaning in Hindi


इस तरह के डिबेंचर्स में निवेशक के लिए यह सुविधा है की वह निश्चित समय के बाद डिबेंचर्स के परिपक़्व होने से पहले ही कंपनी को डिबेंचर्स वापिस दे सकता है।

ऐसा निवेशक तब कर सकता है जब निवेशक को डिबेंचर्स में मिलने वाले ब्याज से ज्यादा ब्याज बाजार में मिल रहा हो।

6. Fixed और Floating Rate Debentures :


डिबेंचर्स के यह प्रकार उसमे मिलने वाले ब्याज के प्रकार से आए है।

i. Fixed rate debentures : Debentures Meaning in Hindi


फिक्स्ड रेट डिबेंचर्स में मिलने वाला ब्याज का प्रतिशत निश्चित अंक में होता है जैसे 8 % या 10 % आदि।

इस से परिपक्वता अवधि तक निवेशक को निश्चित दर से ब्याज मिलता रहता है।

अगर आने वाले समय में ब्याज दर कम हो तो इस से कंपनी को नुकसान हो सकता है।

ii. Floating rate debentures : Debentures Meaning in Hindi


फ्लोटिंग रेट डिबेंचर्स में मिलने वाला ब्याज निश्चित नहीं बल्कि किसी बेंचमार्क से लिंक किया हुआ होता है।

जैसे मिलने वाला ब्याज MIBOR + 2 % हो सकता है।

MIBOR एक बेंचमार्क है जिसका नाम है Mumbai Interbank Offer Rate.

इस ब्याज दर पर मुंबई के बैंक एक दूसरे से ली गई लोन का ब्याज देते है।

यह ब्याज परिस्थिती के अनुसार बदलता है और इसके बदलने से फिक्स्ड रेट डिबेंचर्स का ब्याज भी बदलता रहता है।

इस तरीके से ब्याज अपना संभावित निक्सन कम कर सकती है।

इन सभी प्रकारो में से निवेशक अपने लिए जरुरी डिबेंचर्स खरीद कर निश्चित ब्याज पा सकता है।

उम्मीद करता हु दोस्तों की आपको डिबेंचर्स और उसके प्रकार के बारे में जानकारी मिल गई है।

दोस्तों अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे Social Media में Share करना न भूले।

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