Sunday, February 3, 2019

Actively managed funds in Hindi - Mutual Funds in Hindi

Actively managed funds in Hindi.

Actively managed funds क्या है ? Passive funds क्या होते है ? 


हमें किस में निवेश करना चाहिए ?


अगर आप यह सब सवाल के जवाब ढूंढ रहे है तो आप सही जगह पर आए है।


म्यूच्यूअल फंड्स में लम्बे समय के लिए निवेश करना बहुत ही बढ़िया तरीका है।


लेकिन अगर हम सही म्यूच्यूअल फण्डस का चुनाव करे तभी हम अच्छा पैसा बना सकते है।


इस लिए हमें म्यूच्यूअल फंड्स के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी लेनी चाहिए।

म्यूच्यूअल फंड्स का चुनाव करते वक्त हमारे मन में अक्सर यह सवाल उठता है की हम कौनसे म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करे ?


Actively managed funds (in Hindi) या फिर Passively managed funds.


इस लिए आज हम यह जानेंगे की Actively Managed funds (in Hindi) और Passively managed funds क्या होते है ?


Actively Managed funds (in Hindi) :


इन फंड्स में पैसो को किस समय और किन विकल्पों में या फिर कौनसे शेयर में निवेश करना है वह मैनेजर तय करता है।

इन फंड्स में फण्ड मैनेजर का लक्ष्य  परिस्थिति के अनुसार निवेश कर के फण्ड के सूचकांक से ज़्यादा रिटर्न देना होता है।

यह फण्ड में मैनेजर के साथ खोजकर्ता टीम होती है जो परिस्थिति के अनुसार अच्छे विकल्पों खोजती रहती है।


सामान्य म्यूच्यूअल फंड्स Actively Managed funds के उदहारण है।



Passively Managed funds :


यह फण्ड अपने नाम की तरह ही Passively Managed होते है।


यह फण्ड में मैनेजर का लक्ष्य उस फण्ड के सूचक अंक के अनुसार फण्ड के पैसो को निवेश करना होता है।

यानि फण्ड के पैसो का निवेश फण्ड के सूचक अंक में शामिल कंपनीओ में और उस अनुपात में ही होता है।


इस फण्ड का लक्ष्य लम्बे समय में फण्ड के सूचक अंक जितना रिटर्न लाना होता है।


ऐसे लक्ष्य के पीछे उनका विचार है की लम्बे समय में बाजार के सूचकांक से ज़्यादा रिटर्न कमाना मुस्किल है।


Index Funds  और ETF Passively Managed funds के उदहारण है।



Actively Managed funds (in Hindi) vs Passively Managed funds :


#1. रिटर्न :

Passively Managed funds में मिलने वाला रिटर्न उस फण्ड के सूचक अंक के रिटर्न जितना या उस से कम ही होता है। 

जबकि Actively Managed funds में मिलने वाला रिटर्न ज्यादातर उस फण्ड के सूचक अंक के रिटर्न से ज़्यादा ही होता है। 


#2. Expense Ratio :


Passively Managed funds में Expense ratio बहुत ही कम होता है।



जबकि Actively Managed funds (in Hindi) में Expense ratio 2 प्रतिशत भी हो सकता है। 


यह भी पढ़े : Mutual Funds में  Expense ratio, Entry Load और  Exit Load क्या होता है?



हमें कौनसे फण्ड में निवेश करना चाहिए ?


आप कौनसे फण्ड फण्ड में निवेश करेंगे वो तो आपके बाजार के प्रति लक्ष्य पर निर्भर करता है।


दोनों तरह के फंड्स के अपने अपने लाभ और नुकसान है।


यदि आप Actively Managed funds में निवेश करेंगे तो आपको ज़्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है। 


लेकिन उन फंड्स में आपको फीस भी ज़्यादा देनी पड़ती है।

और अगर Passively Managed funds में निवेश करेंगे तो आपको कम रिटर्न मिलेगा लेकिन वह पर आपको फ़ीस भी बहुत कम देनी पड़ेगी।



इस लिए आप जीस भी फण्ड में निवेश करे तब यह सब कुछ ध्यान में रख कर ही करे।


उम्मीद करता हु की आपको Actively Managed funds (in Hindi) के बारे में समझमे आ गया होगा। 


आप कौनसे फण्ड में निवेश करना चाहते है वह हमें Comment Box में जरूर बताए।


दोस्तों अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी होतो इसे Social Media पर जरूर Share करे।


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