Wednesday, November 21, 2018

Types Of Mutual Funds in Hindi - Mutual Funds in Hindi

Types Of Mutual Funds in Hindi

यहाँ पर जाने के Mutual Funds के प्रकार कोनसे होते है ?
Mutual Funds kis prakar ke hote hai ?
अब तक हमने म्यूच्यूअल फंड्स सही है या नहीं और उसमे किस तरह से निवेश करते है वो देखा।

आज हम ये जानेंगे की Mutual Funds के प्रकार कोनसे होते है। 


Mutual funds वो किस तरह के निवेश के विकल्प में निवेश करते है उस पर से मुख्य तीन प्रकार के होते है।

1) Equity Funds, 
2)Debt Fundsऔर 
3) Hybrid Funds

1) Equity Funds:


इन Mutual Funds में निवेश किए गए पैसो से बहुत सी कंपनियों के शेयर्स को ख़रीदे जाते है।


ऊपर दिए गए निवेश विकल्पों के प्रतिशत सिर्फ उदहारण के लिए है , असल में यह प्रतिशत अलग अलग होते है। 

इसी वजह से ये Mutual Funds सबसे ज़्यादा जोखिम भरे तथा सबसे ज़्यादा रिटर्न देने वाले होते है।

इन Mutual Funds में निवेश करने की अवधि कम से कम 5 साल की रखनी चाहिए।


जिससे की आपकी निवेश की हुई राशि पे अच्छा रिटर्न मिल सके। 


जितनी लम्बी अवधि के लिए आप इन Mutual Funds में निवेश करेंगे उतना ज़्यादा रिटर्न आपको मिलेगा।


यह पढ़े : Liquid Funds क्या होते है?

हालाँकि निश्चित तौर पर तो कोई नहीं कह सकता। 

लेकिन अब तक ऐसा देखा गया है की इन Mutual Funds में मिलने वाला औसतम रिटर्न सालाना 15 प्रतिशत का होता है।


ये Mutual Funds जो कंपनीओ में निवेश करते है उनकी Size के हिसाब से तीन तरह के होते है।

       1.Large Cap (लार्जकैप फंडस),
       2.Mid Cap (मिडकैप फंडस) और 
       3.Small Cap (स्मॉलकैप फंडस).


[ यहाँ पर उपयोग किया गया शब्द Cap से मेरा मतलब Market Capitalization है। ]

यह भी पढ़े : Market Capitalization क्या होता है ?

1) Large Cap Funds(लार्ज कैप फंडस):


इस तरह के फंड में निवेश किया गया पैसा Large cap कंपनीओ में निवेश किया जाता है जिसका Market Cap 10000 करोड़ से ज़्यादा होता है। 

ये सभी कंपनिया देश की सबसे बड़ी कंपनिओ में से एक होती है। 


जो की बहोत वर्षों से अपने व्यापार को अच्छी तरह से करती हो। 


इस Mutual Funds में निवेश करने का एक फायदा यह होता है की जब बाजार में भरी गिरावट होती है तब ये पुरे बाजार के मुकाबले यह कम गिरते है।

जिस से इस में निवेश किया हुआ पैसा बाकि दोनो तरह के Funds यानि 
Midcap और Smallcap funds से थोड़ा ज़्यादा सुरक्षित रहता है।

इन funds में निवेश करने का एक नुकशान भी है क्योकि जब बाजार में बहोत तेज़ी चल रही होती है तभी इस तरह के funds में तेज़ी बाजार से थोड़ी कम होती है।


जिस से बाकि दोनों के मुकाबले में रिटर्न थोड़ा कम मिलता है।


इस तरह के funds में सभी निवेशको को थोड़ा पैसा तो निवेश करना ही चाहिए ताकि थोड़ी सुरक्षा मिल सके।


२) Mid Cap Funds(मिड कैप फंडस):


इन तरह के funds में निवेश किए गए पैसो को जिन कंपनीओ का Market Cap 500 करोड़ से 10000 करोड़ के बीचमे होता है उन कंपनीओ में निवेश किया जाता है। 

इस तरह की कंपनिया Large Cap कंपनीओ से थोड़ी ज़्यादा जोखीम भरी होती है। 

इस लिए यह Large Cap से थोड़ा ज़यादा रिटर्न देती है। 

यह तेज़ी के समय में ये Large Cap कंपनिओ से ज़्यादा रिटर्न देती है और गिरावट के समय में ये Large cap से ज़्यादा गिरती है। 

इस तरह के funds में भी निवेश की अवधि कम से कम 5 साल रखनी चाहिए।


3) Small Cap Funds(स्मॉल कैप फंडस):


इस तरह के funds जीन कंपनीओ का Market cap 500 करोड़ से कम हो उन कंपनीओ में पैसा निवेश करते है। 

ये कंपनियां बहोत छोटी होती है और सिर्फ कुछ सालो पहले ही शुरू हुयी भी हो शकती है।

ये कंपनिया अगर अच्छा काम करे तो सिर्फ कुछ ही सालों में कई गुना भी हो सकती है और अच्छा काम न करे तो बहोत गिर भी सकती है। 

यह भी पढ़े : Liquid Funds क्या होते है?

वैसे तो कोई भी equity funds में निवेश करने पर जोखिम तो रहता है, लेकिन इस तरह के funds में सबसे ज़्यादा जोखिम रहता है।

और ये funds सबसे ज़्यादा रिटर्न भी देते है।


इन funds में अगर आप निवेश करेतो इस के साथ साथ एक 
large cap fund में भी निवेश करना चाहिए ताकि थोड़ी सुरक्षा मिल जाए।

2) Debt Funds:


Debt का सीधा मतलब है क़र्ज़। 

इस तरह के funds में निवेश किये गए पैसो को क़र्ज़ के रूप में दे कर उनसे ब्याज कमाया जाता है। 


ऊपर दिए गए निवेश विकल्पों के प्रतिशत सिर्फ उदहारण के लिए है , असल में यह प्रतिशत अलग अलग होते है। 

ये funds सरकार के द्वारा जारी किये गए Bonds और T-bills को खरीदते है। 

जो निश्चित समय के होते है और जिनसे निश्चित ब्याज निश्चित अवधि में मिलता रहता है।

ये funds Corporate bonds,Commercial papers,Certificate of deposits और Debentures में भी निवेश करते है। 

इन सभी विकल्पों में से निश्चित ब्याज मिलता रहता है। 

इस लिए debt funds में निवेश किया हुआ पैसा बाकि सबसे ज़्यादा सुरक्षित होता है लेकिन इन funds से रिटर्न अन्य तरह के funds कम मिलता है।

इन funds में सबसे ज्यादा निवेश उन लोगो को करना चाहिए जो की ज़्यादा जोखिम नहीं ले सकते। 


जैसे जिनकी निवृती में कुछ साल ही बचे हो। 

क्योंकि उनके लिए निवेश की हुई राशि की सुरक्षा ज़्यादा अहम् होती है।

इन funds में निवेश की अवधि और मिलने वाला रिटर्न विभिन्न funds पर निर्भर करता है।

3)Hybrid funds:


Hybrid funds में निवेश किए हुए पैसो का कुछ हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया जाता है और बाकि का हिस्सा क़र्ज़ देने में उपयोग किया जाता है।

ऊपर दिए गए निवेश विकल्पों के प्रतिशत सिर्फ उदहारण के लिए है , असल में यह प्रतिशत अलग अलग होते है। 

जिस से शेयर बाजार में निवेश कि हुई राशि से अच्छा रिटर्न मिल सके और क़र्ज़ के रूपमे निवेश की हुई रकम से सुरक्षा मिल सके। 

इस तरह के funds equity funds से कम जोखिम भरे और debt funds से ज़्यादा जोखिम भरे तथा ज़्यादा रिटर्न देने वाले होते है।

इन सभी में ओरभी प्रकार होते है लेकिन उनके बारे में हम आगे आने वाले समय में जानेंगे।

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