Wednesday, November 28, 2018

Expense Ratio in Mutual Funds क्या है ?

पिछली पोस्ट में हमने Direct vs Regular Mutual Funds में से कौनसा चुनना चाहिए वो देखा था।

आज हम जानेंगे की Expense Ratio in Mutual Funds क्या होता है ?

Expense Ratio in Mutual Funds क्या है ?



एक निवेशक के लिए Expense ratio म्यूच्यूअल फंड्स से जुड़ा हुआ एक खर्च है।

हम जानते है की Mutual funds को Asset Management Companies चलाती है।

Mutual Funds को चलाने के लिए उन्हें कुछ खर्चे करने पड़ते है जैसेकि Fund Manager की फ़ीस, ऑफिस और कंप्यूटर सेटअप के खर्च, Distributor या फिर Agent का कमीशन और विज्ञापन के खर्च आदि।

ये सभी खर्च और AMC का लाभ सब कुछ जोड़ के Expense ratio बनता है। 

वैसे तो Expense ratio सालाना गिना जाता है लेकिन उसे NAV को गिनते वक्त ही काटा जाता है।

हम जानते है की NAV को हर रोज गिना जाता है।

Expense ratio आम तौर पर 1 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक होता है लेकिन ये अलग अलग Mutual Funds में अलग अलग होता है। 

उदाहरण के तौर पर अगर किसी फंड का expense ratio 1 प्रतिशत है और अगर आपने उसमे 2 लाख रूपए निवेश किए है जिसका आज का मूल्य 2 लाख 1 हज़ार रूपए है तो,
आज का  Expense = (0.01 * 201000) / 365 
                                        = 5.50 रूपए

होगा जोकि आज की NAV गिनते समय ही काट लिया जाएगा।

इस Expense Ratio का एक अच्छा खासा हिस्सा Distributor या Agent का कमीशन होता है।

जब Direct Plan की शुरुआत नहीं हुई थी तब सभी निवेशकों को यह कमीशन देना ही पड़ता था।

लेकिन Direct Plan के Expense ratio में distributor का कमीशन नहीं होता।

इस लिए ही Direct plan में Regular plan से ज़्यादा रिटर्न मिलता है। 

निवेश के लिए किसी भी Mutual Fund को चुनते वक्त हमें उनके Expense Ratio की तुलना जरूर करनी चाहिए।

क्युकी एक निवेशक के तौर पर हमारे लिए तो यह एक खर्च ही है।

अब हम Mutual Funds से जुड़े दो और खर्च के बारे में भी जान लेते है।

जो की है, Entry Load और Exit Load.

क्या होता है Entry Load और Exit Load ?


Entry Load और Exit Load भी Charges ही है जो की फंड्स, निवेशकों को दिए जाने वाले रिटर्न में से काटते है।

Entry Load :


इनमे से Entry Load का मतलब है, की Mutual Funds में निवेश की शुरुआत करने के लिए लगने वाला पैसा।

एक अच्छी बात यह है की Entry Load अगस्त 2009 से पहले लगता था।

लेकिन उसके बाद से SEBI ने Entry Load को रद कर दिया है।

Exit load :


जैसे हम FD की अवधि ख़त्म होने से पहले निवेश की हुई राशि निकालते है तो हमें Penalty के तौर पर कुछ ब्याज कम मिलता है।

वैसे ही जब भी कोई निवेशक तय की हुई अवधि के पहले Mutual Funds में से पैसा निकालता है तब उसको मिलने वाली राशि पर Exit Load लगाया जाता है।

FD में लगी हुई Penalty से हमें सिर्फ Return ही कम मिलता है, मूल राशि पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

लेकिन Mutual Funds में ऐसा नहीं होता।

Mutual Funds में मिलने वाला रिटर्न निश्चित न होने से इसमें Exit load लगने से आपकी मूल राशि कम भी हो सकती है।

उदाहरण :


श्रीमान विजय ने अपने 1 लाख रुपए 6 महीने पहले एक Equity Mutual Fund में निवेश किए है।

और पिछले दो महीनो से बाज़ार में चल रही मंदी की वजह से उसके 1 लाख रुपए की किमत अब 99 हज़ार ही हो गई है।

अभी श्रीमान विजय जी को आपातकालीन स्थिति के लिए कुछ पैसो की जरुरत है।

इस लिए वह अपने Mutual Funds बेचना चाहता है।

अब इस स्थिति में अगर श्रीमान विजय अपना Mutual Funds का निवेश बेचेंगे तो उसे 1 % की Penalty लगेगी।

इस तरह उनके पास 99 हजार में से उसका 1 % घटा कर 98,100 रुपए ही मिलेंगे।

जबकि उन्होंने निवेश तो 1 लाख रुपए का किया था।

इस लिए निवेश से पहले इस बात को जरुर समझ ले।

और Exit Load से बचने तथा अच्छा रिटर्न पाने के लिए लम्बी अवधि का ही निवेश करना चाहिए।

तो दोस्तों यह था Expense Ratio in Mutual Funds, Entry और Exit Load के बारे में जानकारी।

उम्मीद करता हु आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित हुई होगी।

अगर ऐसा है, तो इसे अपने Social Media पर जरूर Share करे जिस से बाकि लोग भी Exit Load से बच सके।

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